An Interview Session With Divya Prakash Dubey in Hindi

Divya Prakash Dubey – दिव्य प्रकाश दुबे जिनको हम सब DP के नाम से भी जानते हैं, उनका जन्म 8 मई 1982  को बनारस में हुआ था। वो हिन्दुस्तान के पहले हिंगलिश लेखक हैं। उनकी लिखित  कहानियों पर आधारित बहुत सी शार्ट फ़िल्में भी बन चुकी हैं।  उनकी 3 बेस्ट सेलर्स किताबें Terms and conditions apply, मसाला चाय और मुसाफिर कैफ़े हैं।

लेखन की उनकी संलयन शैली उन्हें अन्य लेखकों के रूप में अलग बनाती है। उनके अन्य ग्राउंड ब्रेकिंग प्रयासों में संडे वाली चिट्ठी और स्टोरीबाज़ी शामिल हैं।

TEDx, Times of India और The Quint के आर्टिकल्स में आने से लेकर Amazon Kindle Direct Publishing के हिन्दी ब्रांड एम्बेसडर हुए दिव्य प्रकाश दुबे के साथ आज Digital Marketing पर चर्चा करेंगे।

सवाल

1- आपके साथ जुड़ के अच्छा लगा, लिखने की रूचि से लेकर एक प्रसिद्ध लेखक होने तक आपका सफ़र कैसा रहा?

सफ़र अच्छा रहा। ऐसा कोई संघर्ष नहीं रहा लेखक बनने में। मुझे शुरू से ही पढ़ने का शौक़ रहा क्यूंकि घर में पढ़ाई का माहौल था। जब मैं छोटा था तब लेखक होना मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी क्यूंकि वो एक अलग ही दुनिया थी जहाँ लोग लेखक होते थे। लेखक बनने का मुझ पर कभी कोई दबाव नहीं रहा क्यूंकि मैंने लेखन को कभी आजीविका (Career)  के रूप में देखा ही नहीं क्यूंकि हमें पूरी तरह विश्वास ही नहीं था की हम लेखक होके भी कुछ कर पाएंगे। लेखक बनने से पहले मैं  MBA की लाइन चुन चूका था। लिखने का शौक़ तो शुरू से ही रहा मगर एक हिन्दी लेखक के रूप में अपनी पहचान बनाने में पिछले 5 साल का बड़ा योगदान रहा है। लिखना मेरे लिए कभी चुनौतीपूर्ण नहीं रहा लेकिन तीन किताबें  लिखने के बाद चुनौती है कि अब क्या नयी चीज़ लिखी जाये…

जिनके पास खोने के लिए कुछ नहीं होता वो फ़ैसला जल्दी ले लिया करते है।दिव्य प्रकाश दुबे

2- आप Digital Marketing का प्रयोग अपने career में कैसे करते हैं?

हमारा पूरा Career digital marketing पर ही निर्भर है ख़ास तौर से “नयी वाली हिंदी” को लोगो तक पहुंचाने में Digital Marketing का बहुत बड़ा योगदान है। किताबों की सूचीकरण (Shortlisting) का जो पारम्परिक चलन था, वो रास्ता हमने अपनाया ही नहीं। हमने प्रमोशन सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटस से शुरू किया और ऐसा Content शेयर किया जिससे लोग सम्बंधित हो सकें, लोग वही पसंद करते हैं, जिससे वो जुड़ाव महसूस करते हैं। हमारा offline प्रमोशन था ही नहीं। आज से 5 साल पहले मेरी बुक का प्रोमो वीडियो बना था जो की हिन्दी की किताब के लिए पहली बार हुआ था। आप कह सकते हैं कि हिन्दी किताबों में प्रोमो वीडियो का trend मेरे बाद से ही शुरू हुआ।

 जिंदगी की कोई भी शुरुआत हिचकिचाहट से ही होती है। बहुत थोड़ासा घबराना इसीलिए जरूरी होता है क्यूँकि अगर थोड़ी भी घबराहट नहीं है तो या तो वो काम जरूरी नहीं है या फिर वो काम करने लायक ही नहीं है।  दिव्य प्रकाश दुबे

 3- आने वाली युवा पीढ़ी के लिए Digital Marketing क्या सहयोग रखती है?

पिछले 2 साल से हर व्यक्ति की एक digital identity रही है। आजकल कितने ही ऐसे लोग हैं जो Digital Marketing के माध्यम से सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटस  का प्रयोग करके Digital Celebrity बन गए हैं जबकि उनके असली नाम कोई नहीं जानता लेकिन सोशल वेबसाइटस  पर  उनके Followers की संख्या लाखों और हज़ारों में है। Digital एक नया माध्यम बन चुका है। ऑफिस भले ही एक कमरे का हो, पर वेबसाइट  में हज़ार कमरे होने चाहिए। आजकल हम दोस्तों से भी कहाँ मिल पाते हैं जबतक की कोई मीटिंग ना हो। Digital एक वैकल्पिक संसार है, अगर आप वहाँ मौजूद नहीं हैं तो आप कहीं मौजूद नहीं। अक्सर आप  लोगों को देखेंगे के वो Digital Platform पर जैसे होते हैं व्यग्तिगत स्तर पर वैसे नहीं होते। आपको अपने लिए अपने ब्रांड की तरह काम करना होता है।

“Your name is your online shop and you have to create it like a brand”

और आपको उसमे सावधान होना चाहिए तभी आप आगे बढ़ सकते हैं।

जब भी कोई कन्फ्यूज़न हो कि ये काम करना चाहिए या नहीं करना चाहिए  तो बस बिना ज़्यादा कुछ सोचे वो काम कर लेना चाहिए। लाइफ बहुत  आसान हो जाती हैदिव्य प्रकाश दुबे

4- आप अपनी किताब को कौन कौनसी Marketing Strategies से प्रमोट करते हैं?

किताब को प्रमोट करने के लिए हम Digital Marketing में जो माध्यम कार्यरत हैं जैसे ऑनलाइन पोस्टर्स शेयर करना ऐसे Quotes शेयर करना जो लोगों के साथ सम्बंधित हो सकें और प्रमोशनल वीडियोस बनाना इत्यादि  marketing strategies का उपयोग करते हैं। प्रोमोशंस के लिए कंटेंट बहुत महत्व रखता है, कंटेंट ऐसा होना चाहिए जो लोगों को याद रहे या आप कह सकते हैं के ज़बान पर चढ़ जाए, जैसे आप मूवी देखते हैं तो आपको मूवी के डायलॉग्स याद रह जाते हैं तो ऐसा ही कुछ आपके प्रोमोशंस में भी होना बहुत ज़रूरी है जो आपके हर उम्र की पाठकों के साथ सम्बंधित हो सके।

रास्ते केवल वो भटकते हैं जिनको रास्ता पता हो, जिनको रास्ता पता ही ना हो उनके भटकने को भटकना नहीं बोला जातादिव्य प्रकाश दुबे

5- TEDx में हिन्दी बोल कर आजाना अपने आप में एक अद्भुत बात है? नयी वाली हिन्दी प्रथा को पब्लिक तक पहुचाने में Digital Marketing का क्या योगदान है?

TEDx में 2 विडिओज़ अपलोड हुए, पहले पर 3 लाख और दूसरे पर 5 लाख व्यूज़ हैं। दोनों मिला कर 8 लाख व्यूज़ हैं। वो 8 लाख लोग जब दिव्य प्रकाश को सुनेंगे तो केवल मुझ तक नहीं बल्कि सत्य व्यास, आशीष चौधरी जैसे सभी कलाकार लोगो तक पहुचेंगे जो उनको अलग दुनिया में ले जायँगे। सिर्फ़ पढ़ाके हम अपनी बात दूर तक नहीं ले जा सकते किन्तु बोल कर हम ये कर सकते है।

TEDx में हिन्दी में बोलना एक बड़ी क्रांति थी जिसके बाद से और लोगों ने भी हिन्दी में बोला और मैंने इसलिए हिन्दी में बोला ताकि गाँव में रहने वाले जो बच्चे हैं जिनकी संख्या काफ़ी ज़्यादा है उनको ये लगे कि वो जैसे हैं वैसे ही वो किसी भी बड़े प्लेटफार्म पर जा सकते हैं, उसके बाद लोगो ने हिन्दी को बैकवर्ड नहीं समझा और मैं उनको ये समझा पाया की हिन्दी बोलने में कोई शर्म नहीं बस विश्वास होना चाहिए। Digital Media हमे वो पॉवर देता है जिससे हम अपने स्किल्स  को प्रेजेंट कर सकें बिना  अपनी बनाई हुई रंगबाज़ पर्सनालिटी को आकर्षित करे। हाल ही में एक यूट्यूब चैनल बहुत प्रसिद्ध हो गया है “Make Joke Of” के नाम से जिसमे कानपुर की बोली का प्रयोग होता है। दुनिया भर से उन्हें प्यार मिल रहा है और लोग उसे पसंद कर रहे हैं।हमारे मध्यम वर्ग का बैकग्राउंड बहुत नकली है, हर माता-पिता अपने बच्चे पर अंग्रेजी बोलने का दबाव डालते हैं। TEDx द्वारा मुझे सुनने के बाद  हज़ारों लोग हिन्दी से जुड़े होंगे और समझे होंगे कि हिन्दी बहुत cool है और मेरी  किताबें भी पढ़ी होंगी।

हम सब शहर में रहते हैं, मगर हम सबका एक गाँव होता है जहाँ हवा अच्छी होती है, घर बड़े होते हैं, हम वहाँ रहते नहीं हैं, मगर गर्मियों की छुटियाँ वहीं बिताना पसंद करते हैं। हिन्दी उस गाँव में नानी का पुराना घर है जहाँ पर कोई दबाव नहीं होतादिव्य प्रकाश दुबे

6- आने वाले लेखक जो Digital Marketing से जुड़ना चाहते हैं उनको आप क्या सलाह देना चाहेंगे?

हमसे  हज़ारो  साल  पहले  से  लिखा  जा  रहा  है और  हज़ारो  साल  बाद  तक  लिखा  जायगा। आगे  क्या  लिखा  जाएगा  वो  तो  हमारे  हाथ  में  नहीं  है  मगर  हमारे  पीछे  जो  लिखा  गया  है  उसको  हमें  एक  बार  पड़ना  चाहिए।

दुनिया  ने  सालो  से  नयी   बात  ढूंढी  नहीं  बस  हर  बार  बात  करने  वाले  लोग  नए  हो  जाते  हैं।

जैसे  पुरानी दिल्ली, वैसे  पुराना लखनऊ और  वैसे  ही भोपाल। ऐसा ना  हो  की हम  वही  डिस्कवरी  करके  उसे  हैशटैग  #newdiscovery का  नाम  देदें   और  सोचें  की  हमने  कोई  तीर  मार  लिया  है। डिजिटल  में  लाइक्स  और रिव्यूज़ जब लोग ज़्यादा  सीरियसली  लेते  है  तो  वह  चीज़े   आपके  सर पर  चढ़  जाती  है  और  आप  समझ  नहीं   पाते   की  इससे  आगे  भी  डिजिटल  मार्कटिंग  के  रूप  है। मुझे  आज  तक  नहीं  पता  की  वो  Blue Tick कैसे  मिलता  है  पर  कुछ लोग  सिर्फ  अपने  नाम  के  आगे ब्लू टिक  लगाने  को  सक्सेस  समझ  लेते  है  ऐसा  होने  से  आप  थोड़ी  ना  बदल  जाओगे  आप  तो  वैसे ही  रहोगे  न  जैसे  हो। मुझको  लगता  है की  अगर  आप  इन  सब  चीज़ों  पर  ध्यान  दोगे   तो  कुछ  बड़ा  नहीं  कर  सकोगे  आप  सिर्फ  लाइक्स  तक  ही  सीमित  होकर  रह  जाओगे।

7- शिक्षा व्यवस्था में Course Inbox पहला ऐसा संस्थान है जो प्रमाणपत्र से ज़्यादा Digital skills में विश्वास करता है सस्ते शुल्क के साथ। आपका क्या विचार है?

दहेज़ लेना और देना दोनों ही पाप है। अगर मेहँगे संस्थान के इस दौर में आपका इंस्टिट्यूट वही कोर्स सस्ते शुल्क में दे रहा है, तो ये एक अच्छी शुरुवात है और आने वाले कुछ सालो में आपका इंस्टिट्यूट कामयाबी पाएगा। ऑल द बेस्ट!

जब रात में अच्छी नींद आना बंद हो जाये तब मन लेना चाहिए की आगे ज़िन्दगी में ऐसा मोड़ आने वाला जिसके बाद सब कुछ बदल जायेगादिव्य प्रकाश दुबे



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